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जेटली का बजट प्राइवेट सैक्टर में नई नौकरियां पैदा करने वाला

by on February 2, 2018
 
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– एक्सपर्टस के मुताबिक, उद्योगपतियों को टैक्स में छूट और नौकरी पेशा लोगों को लाभ नहीं मिलने से मध्यम वर्गीय परिवारों में गया है गलत संदेश

वित मंत्री अरुण जेटली ने बृहस्पतिवार दोपहर को जैसे ही वित वर्ष 2018-19 का आम बजट पेश किया तो देश के मध्यम वर्गीय व सैलरीड क्लास लोग इससे निराश हो गए। इनकम टैक्स स्लैब में छूट मिलना तो दूर एजुकेशन और हैल्थ सेस को तीन प्रतिशत से चार प्रतिशत कर मिडल क्लास पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया। उपर से उद्योगों जगत पर लगने वाले 30 प्रतिशत का टैक्स को घटाकर 25 प्रतिशत करना आमजन को जले पर मिर्च छिड़कने जैसा लगा। आमजन में यह संदेश गया कि यह सरकार मध्यम वर्गीय परिवारों पर बोझ डालकर उद्योगपतियों के लिए काम कर रही है, परन्तु यह सत्य नहीं है।

टैक्स एक्सपर्ट चार्टर्ड अकाउंटेंट मनीष गुप्ता की माने तो मोदी सरकार ने यह एक बोल्ड कदम उठाया है। जिससे न सिर्फ मध्यम वर्गीय परिवारों को इसका फायदा होगा, बल्कि युवाओं के लिए नए नौकरी के अवसर भी पैदा होंगे। हमें समझना होगा कि देश में 90 प्रतिशत से अधिक उद्योग 250 करोड़ के नेट व‌र्थ के दायरे के अंदर ही आते हैं। 30 प्रतिशत से 25 प्रतिशत टैक्स का लाभ केवल 250 करोड़ तक टर्न ओवर वाली कंपनियों को ही मिलेगा। मोदी सरकार के इस कदम से उद्योग जगत में तेजी आएगी।

एक्सपर्ट बताते हैं कि देश का जबतक देश की आर्थिक सेहत यानी जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) दर नहीं सुधरेगी तबतक नई नौकरी के अवसर पैदा होना संभव ही नहीं है। सरकारी नौकरियां हमेश सीमित होती हैं, ऐसे में जबतक प्राइवेट सैक्टर में उछाल नहीं आएगा, देश में पढ़े लिखे बेरोजगार युवाओं के लिए उचित नौकरी के अवसर पैदा कर पाना संभव नहीं है।

 

Source: Punjab Kesari

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