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अगर आरोपियों को गिरफ्तार करती पुलिस तो कुछ और ही होता नतीजा

by on February 10, 2018
 
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रोहिणी जिला अदालत ने दुष्कर्म के मामले में मंगोलपुरी से विधायक और विधानसभा में डिप्टी स्पीकर राखी बिडलान के पिता को दुष्कर्म के मामले में बरी कर दिया है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट तौर पर कहा कि जांच अधिकारी ने पेश मामले में आरोपियों को गिरफ्तार करने की जहमत तक नहीं उठाई। अगर वह ऐसा करते तो निश्चित तौर पर इस मामले का नतीजा कुछ और ही होता।
फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज शैलेंद्र मलिक ने कहा कि निश्चित तौर पर किसी मामले में आरोपी को गिरफ्तार करने व नहीं करने का विशेषाधिकार जांच अधिकारी का होता है। इस मामले में आरोपपत्र 376 (डी) जैसे गंभीर अपराध के अंतर्गत दाखिल किया गया था, जिसमें उम्र कैद तक का प्रावधान है। इसके बावजूद भी जांच अधिकारी ने दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की। सीआरपीसी की धारा- 173 के तहत पेश की गई अपनी रिपोर्ट में भी जांच अधिकारी ने यह बताने की जहमत नहीं उठाई कि आखिर क्यों आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया था।

अदालत ने कहा कि ट्रायल के दौरान पीड़िता ने भूपेंद्र बिडलान और राम प्रताप गोयल को पहचानने से ही इंकार कर दिया था। अगर आरोपियों की गिरफ्तारी हुई होती तो इस केस का भाग्य ही कुछ और होता। नियमों के मुताबिक अगर पीड़िता अपने बयान से पीछे हट भी जाए तब भी अन्य सुबूतों के आधार पर आरोपी को सजा दी जा सकती है, लेकिन अभियोजन पक्ष ने इस मामले में ऐसा कोई मजबूत साक्ष्य पेश किया ही नही जिसके बिनाह पर आरोपियों को सजा दी जा सके, लिहाजा दोनों आरोपियों को बरी किया जाता है।
वहीं, बचाव पक्ष के वकील ‌ऋषिपाल ने अदालत के फैसले पर संतोष जाहिर करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी का टिकट दिलाने के नाम पर विधायक के पिता व अन्य पर झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया था, जिसे वे ट्रायल के दौरान साबित ही नहीं कर पाए।

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